‘बीडीए’ के भ्रष्टाचारी ‘राजकिशोर सिंह’ को ‘भगवान’ मानते!

‘बीडीए’ के भ्रष्टाचारी ‘राजकिशोर सिंह’ को ‘भगवान’ मानते!

‘बीडीए’ के भ्रष्टाचारी ‘राजकिशोर सिंह’ को ‘भगवान’ मानते!

बस्ती। सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच हैं, कि ‘बीडीए’ के भ्रष्टाचारी ‘राजकिशोर सिंह’ को अपना भगवान ‘मानते’ है। इन लोगों का कहना और मानना है, कि पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह हम लोगों के लिए भगवान से कम नहीं हैं, क्यों कि इन्हीें चलते हम लोगों को करोड़पति बननेे का मौका मिला। आप लोगों ने पहली बार सुना होगा कि बीडीए को लूटने वाले भ्रष्टाचारियों ने इसके लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा नेता राजकिशोर सिंह को नए साल की बधाई देते हुए यह कहा कि अगर यह न होते तो हम लोग न कभी मालामाल हो पाते और न कभी बीडीए को बर्बाद ही कर पाते। दुनिया का यह पहला नये साल की बधाई होगी, जहां पर भ्रष्टाचारी पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिशोर को इस लिए बधाई दे रहे हैं, क्यों कि इन्होंने भ्रष्टाचारियों को खुलकर लूटने का मौका दिया। बीडीए को बर्बाद करने वाले गलत नहीं कह रहे हैं, कि अगर राजकिशोर सिंह बीडीए को न बनवाते तो उनका खजाना न भर पाता, और न कभी जीवन में कभी नोटों से भरा ब्रीफकेश उनके पास ही होता। जब-जब बीडीए की बात चलेगी, तब-तब पूर्व कैबिनेट मंत्री का जिक्र होगा, यह पहले ऐसे पूर्व कैबिनेट मंत्री होगें, जिन्हें लोग विकास के लिए बल्कि बीडीए के विनाष के लिए जाना जानेगें। इन्होंने जिस तरह अपने लाभ के लिए बीडीए बनवाया, उसका फायदा इन्हें मिला की नहीं, यह तो नहीं मालूम, लेकिन भवन निर्माणकर्त्ताओं को कितना नुकसान हुआ यह अवष्य सभी को मालूम। ऐसे भी भवन स्वामी है, जिन्हें उत्पीड़न के चलते रोते तक देखा गया, न जाने कितनों को सोने के लिए नींद का टेबलेट लेना पड़ा, बीपी तो न जाने कितनों की बढ़ी।

एक तरह से बीडीए बन जाने से पंकज पांडेय एंड टीम की लाटरी निकल गई, इस टीम के मुखिया और गैंग के सदस्यों ने सपने में भी नहीं सोचा था, कि बीडीए एक दिन उन लोगों के लिए राजकिशोर सिंह का दिया हुआ ऐसा वरदान साबित होगा, जिससे उनके बंगला गाडी और जेवरात का सपना पूरा होगा। हालांकि राजकिशोर सिंह को बार-बार हारने की कीमत भी चुकानी पड़ी। जिले के लोगों को आजतक समझ में नहीं आया कि किस लिए राजकिषोर सिंह ने बीडीए का गठन करने के लिए एड़ीचोटी लगाया। जिले के लोगों के लिए बीडीए किसी श्राप से कम नहीं है। भवन निर्माणकर्त्ताओं का बीडीए के लोगों ने जिस तरह सिरींज लगाकर खून निकालने का काम किया, उसके लिए जिले के लोग राजकिशोर सिंह को कभी माफ नहीं कर पाएगें। बीडीए के भ्रष्टाचारियों के आलावा एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं जिसने बीडीए के गठन के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री को थैंक्स कहा हो। लोगों का कहना है, कि पंकज पांडेय, संदीप कुमार और हरिओम गुप्त जैसे लोग तो जिले के लोगों के लिए पराए थे, लेकिन आप तो अपने थे, तो क्यों आप ने पराए लोगों को बीडीए को लूटने का मौका दिया। वैसे भी नेता कोई काम बिना लाभ के ेनहीं करतें, इसमें पूर्व मंत्रीजी को क्या लाभ हुआ? और कितना लाभ हुआ? यह तो वही जाने। बीडीए का गठन तो करवा दिया, लेकिन बीडीए को बर्बाद करने और लूटने वालों के खिलाफ इन्होंने आज तक न कुछ भी बोले और न बीडीए को समाप्त करने के साथ भ्रष्टाचार की जांच के लिए पत्र लिखा। सच पूछिए तो बीडीए की आवष्यकता ही नहीं थी, यहां की जनता विनियमित क्षेत्र से ही खुश थी, कम से कम षोषण और उत्पीड़न तो नहीं होता था। बीडीए का मतलब विकास से है। कहने की आवष्यकता नहीं कि कितना विकास हुआ। यह भी नहीं कि विकास नहीं हुआ, देखा जाए तो सबसे अधिक विकास अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, एक्सईएन, एई, जेई और मेटों का हुआ। रही बात बीडीए के तीनों सदस्यों के विकास होने की बात तो यही जाने, लेकिन इनकी चुप्पी ने बीडीए को अवष्य भ्रष्टाचार की आग में झोंक दिया। यह लोग माने या न माने लेकिन सच यही है, कि बीडीए के भ्रष्टाचार के लिए यह तीनों अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते। बीडीए की 15 बैठक हो गई, लेकिन एक भी विज्ञप्ति में बीडीए के किसी भी सदस्य का नाम तक नहीं आया, मुद्वा उठाना तो दूर की बात। भले ही पूछने पर यह लोग बहुत कुछ कहनें की बातें मीडिया से करते, लेकिन बीडीए वाले इनका नाम तक देना मुनासिब नहीं समझते। अगर किसी सदस्य को अपनी हैसियत का पता लगाना है, तो वह विज्ञप्ति उठाकर देख लें, जिसमें इनका नाम तक नहीं। इसी लिए इन लोगों को चाय-समोसा वाला सदस्य कहा जाता है। इन्हीं के सामने तीन दर्जन से अधिक अवैध कालोनियों का निर्माण हो गया, चुप रहे, सौ से अधिक सील किए गए भवनों की सील इन्हीं के ही जानकारी में तोड़ी गई, फिर भी यह लोग खामोश रहे। तीन हजार से अधिक अवैध निर्माण हो गया, लेकिन इन लोगों को दिखाई ही नहीं दिया। एक्सईएन की शह पर मेटों के द्वारा कार्यालय एवं बाहर जेई अनिल कुमार त्यागी पर जानलेवा हमला किया और करवाया गया। तब भी यह तीनों चुप रहे। बीडीए प्रदेश का पहला ऐसा विकास प्राधिकरण होगा, जहां पर ‘बीडीए’ के ‘जिम्मेदारों’ को ‘थाली’ में ‘सजा’ सजाया ‘भ्रष्टाचार’ का ‘भोजन’ मिलता है। हर जाने वाला एक्सईएन तोहफे में आने वाले एक्सईएन को भ्रष्टाचार सौंप कर जाता, कहने का मतलब पंकज पांडेय के बोए भ्रष्टाचार के बीज की फसल, एक्सईएन संदीप कुमार और अब हरिओम गुप्त काट रहे है। एक तरह से बीडीए के जिम्मेदारों को विरासत में भ्रष्टाचार और नोटों का बंडल मिलता। बीडीए के लोग कभी न भ्रष्टाचार की फसल काट पाते अगर राजकिशोर सिंह बीडीए न बनवाते। जनता भले ही इनसे नाराज है, और बुरा भला कहती है, लेकिन बीडीए के लोगों इन्हें किसी भगवान से कम नहीं मानते।

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