‘क्या’ एसआईटी, ‘नशे’ के ‘कारोबारियों’ के ‘मनी’ और ‘पावर’ का घमंड ‘चूर’ कर ‘पाएगी’?

‘क्या’ एसआईटी, ‘नशे’ के ‘कारोबारियों’ के ‘मनी’ और ‘पावर’ का घमंड ‘चूर’ कर ‘पाएगी’?

‘क्या’ एसआईटी, ‘नशे’ के ‘कारोबारियों’ के ‘मनी’ और ‘पावर’ का घमंड ‘चूर’ कर ‘पाएगी’?

  • -क्यों कि बस्ती के एसपी को छोड़कर कोतवाल दिनेश चौधरीे, एसओ पुरानी बस्ती जयदीप दूबे, एसओजी प्रभारी निरीक्षक विकास सिंह, क्वाट टीम के प्रभारी चंदन एवं सर्विलांस प्रभारी शेष नाथ यादव की ईमानदारी पर बस्ती के लोग अनेक बार सवाल खड़ा कर चुके?
  • -अगर बस्ती के एसआईटी को ईमानदारी दिखानी है, तो सबसे पहले हर्ष मेडिसिन के लाइसेंस धारक एवं बीसीडीए के अध्यक्ष राजेश सिंह और यश मेडिसिन सेंटर की लाइसेंसधारक एवं राजेश सिंह की पत्नी दिव्या सिंह पर शिकजा कसना होगा, इनके डीसीआर, नेटर्किंगं सिस्टम और बैंक स्टेटमेंट को खंगालना होगा, क्यों कि इन्हीं दोनों फर्मो से सबसे अधिक कोडीनयुक्त दवाओं का अवैध कारोबार किया
  • -अगर एसआईटी अपने मकसद में कामयाब हुई और ईमानदारी दिखाया तो नशे के कारोबार करने वालों का नेक्सस तोड़ा जा सकता, सब कुछ एसआईटी की ईमानदारी पर मामला आकर टिक जाता, क्यों कि एसपी को छोड़कर अन्य को मैनेज करना नशे के कारोबारियों के लिए आसान होगा
  • -जिले में पहली बार एसपी अभिनंदन ने इस अवैध कारोबार को संज्ञान में लेकर एसआईटी का गठन किया, अगर एसआईटी सफल हुई तो एसपी साहब पूरे प्रदेश में हीरो बन जाएगें, एसआईटी की टीम में प्रशासनिक अधिकारियों का षामिल न होना चर्चा का विषय बना हुआ

बस्ती। सफेदपोश कहे जाने वाले चंद समाज के दुष्मनों ने पैसा कमाने के लिए जिस तरह नशे का कारोबार किया और हजारों गरीब परिवारों के मुखिया को नषे का आदी बनाकर उनका घरों को बर्बाद किया, उसका हिसाब-किताब होने का समय लगता है, आ गया है। जांच पड़ताल के लिए जिले में पहली बार एसपी अभिनंदन ने इस अवैध कारोबार को संज्ञान में लेकर एसआईटी का गठन किया, अगर एसआईटी अपने मकसद में सफल हुई तो एसपी साहब पूरे प्रदेश में हीरो बन जाएगें, एसआईटी की टीम में प्रशासनिक अधिकारियों का शामिल न होना चर्चा का विषय बना हुआ। एसआईटी ने अपना काम मंगलवार से शुरु भी कर दिया, बैंक से डिटेल लिए जा रहे है।

अब यह पूरी तरह एसआईटी पर निर्भर हैं, कि वह उन लोगों को सलाखों के पीछे भेजती है, जिन लोगों ने गरीब परिवार के घरों को बर्बाद किया, या फिर ऐसे लोगों की चढढी बनियाइन उतारती हैं, या फिर आजाद घूमने का मौका देती है। क्यों कि बस्ती के एसपी को छोड़कर एसआईटी टीम में शामिल कोतवाल दिनेश चौधरीे, एसओ पुरानी बस्ती जयदीप दूबे, एसओजी प्रभारी निरीक्षक विकास सिंह, क्वाट टीम के प्रभारी चंदन एवं सर्विलांस प्रभारी शेष नाथ यादव की ईमानदारी पर बस्ती के लोग अनेक बार सवाल खड़ा कर चुके? वैसे भी इतनी बड़ी टीम को मैनेज करना आसान नहीं होगा, क्यों कि इसकी मानिटरिगं खुद एसपी कर रहे हैं। अगर एसआईटी को ईमानदारी दिखानी है, तो सबसे पहले ‘हर्ष मेडिसिन’ के लाइसेंसधारक एवं बीसीडीए के अध्यक्ष राजेश सिंह और ‘यश मेडिसिन सेंटर’ की लाइसेंसधारक एवं राजेश सिंह की पत्नी दिव्या सिंह पर शिकजा कसना होगा, इनके डीसीआर, नेटर्किंगं सिस्टम और बैंक स्टेटमेंट को खंगालना होगा, क्यों कि इन्हीं दोनों फर्मो से सबसे अधिक कोडीनयुक्त दवाओं का अवैध कारोबार हुआ। अगर एसआईटी नशे के कारोबार करने वालों का नेक्सस को तोड़ना चाहती है, तो टीम के प्रत्येक सदस्य को ईमानदार बनना पड़ेगा। अब यह सब कुछ एसआईटी की ईमानदारी पर निर्भर करेगा। क्यों कि नशे के कारोबारियों के लिए एसपी को छोड़कर अन्य को मैनेज करना आसान होगा। अगर यही एसआईटी जिले के बाहर के लोगों की बनाई जाती तो उतना सवाल खड़ा नहीं होता, जितना बस्ती के एसआईटी पर खड़े हो रहे है। वैसे कमिश्नर ने भी इस मामले में खासतौर से बोगस फर्म को लाइसेंस देने के मामले में कार्रवाई करने के मूड में दिखाई देते हैं, इसका ईशारा उन्होंने एक दिन पहले मीडिया के सामने कर भी चुके है। वैसे इस मामले में बड़ी कार्रवाई होना इस लिए आसान नहीं माना जा रहा है, क्यों कि इस मामले में डिप्टी सीएम जैसे बड़े लोगों के शामिल होने की चर्चा हो रही है।  अगर ऐसा नहीं होता तो बस्ती के नशे के कारोबारी यह कहते हुए नहीं फिरते कि उनका कुछ नहीं होगा, क्यों कि बस्ती से लेकर लखनऊ तक उन लोगों की सेटिगं हो चुकी है। राजेश सिंह अगर बीडीसीए के अध्यक्ष होते तो उतना चर्चा नहीं होता, जितना यह एआईओसीडी जो देश की एक मात्र ऐसी संगठन हैं, जो पूरे देश में काम कर रही है, उसके पदाधिकारी न होते। अब जरा अंदाजा लगाइए कि होलसेल दवाओं का कारोबार करने वाले चार-पांच लोग मिलकर अवैध रुप से करोड़ों कमाने के लिए एक साजिश रचते है। इस साजिश में डीएलए और डीआई को भी पार्टनर के रुप में शामिल करते हैं, क्यों कि बिना इनके शामिल हुए साजिश को अंजाम नहीं दिया जा सकता। इन लोगों ने मिलकर गणपति नामक फर्म के नाम होलसेल का लाइसेंस बिना यूपीजीएसटी का दिलवाया। इसी बोगस फर्म के जरिए लाखों शीशी कोडीनयुक्त सीरप का अवैध कारोबार हुआ। आप लोगों को जानकर हैरानी होगी, यह अवैध कारोबार पिछले दो सालों से बस्ती में हो रहा है, सवाल उठ रहा है, कि क्या ऐसा हो सकता है, कि इसकी भनक डीएलए एवं डीआई को न लगी हो। अगर लखनउ वाले सक्रिय न होते तो डीएलए और डीआई कभी न कार्रवाई करते। जब इस मामले में कई मेडिसिन के रिटेलर्स से बात की गई तो सभी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीसीडीए के अध्यक्ष ने जो भी किया वह बहुत गलत किया। कहते हैं, कि आप पूरे मार्केट में चले जाइए आप को एक भी शीशी कोडीन सिरप की नहीं मिलेगी, क्यों कि इसके बेचने पर इतनी सारी समस्या आती है, कि लोगों ने बेचना बंद कर दिया। यह भी कहते हैं, कि यह सिरप दवाओं के दुकानों पर तो नहीं मिलेगी, लेकिन परचून, चाय और पंचर बनाने वाले के यहां अवष्य मिल जाएगी।

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