सदस्य ‘चाय-समोसा’ खाते ‘रहें’ और बीडीए ‘लुटता’ ‘रहा’
- Posted By: Tejyug News LIVE
- क्राइम
- Updated: 3 January, 2026 19:42
- 54
सदस्य ‘चाय-समोसा’ खाते ‘रहें’ और बीडीए ‘लुटता’ ‘रहा’
- -सदस्यों को ‘चाय समोसा’ में फंसाकर, पंकज पांडेय एंड टीम ने 20 अवैध कालोनियों के मानचित्र को स्वीकृति कर कालोनाइजर्स से कमाया करोड़ों
- -अवैध कालोनियों का मैपिंग के नाम पर बीडीए ने रिमोट सेंसिगं एप्लीकेशन संेटर को किया सात लाख का भुगतान, सर्वे में निकला 37 अवैध कालोनी, 17 कालोनी को अवैध दिखाया और 20 अवैध कालोनी को छिपा लिया, बाद में भारी रकम लेकर सभी का मानचित्र अवैध रुप से स्वीकृति कर दिया
- -बीडीए ने सर्वे करने वाली फर्म को तो भुगतान पूरा किया, लेकिन पंकज पांडेय एंड टीम ने सर्वे रिपोर्ट ही नहीं लिया, इस तरह पंकज पांडेय एंड टीम ने सात लाख का वित्तीय नुकसान किया, जो कि जांच का विषय
- -इतना ही नहीं बीडीए ने रिमोट सेंसिगं एप्लीकेशन संेटर से अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए अवैध कालोनियों के अतिरिक्त आवास, होटर्स, नर्सिंग होम सहित अन्य अवैध निर्माण होने वाले प्रतिष्ठानों की मैपिंग के लिए 33.69 लाख का एग्रीमेंट किया, प्रथम किष्त के रुप में 16.84 लाख का चेक भी दिया, लेकिन उस चेक को पंकज पांडेय एंड टीम ने जानबूझकर चेक को बाउंस करवा दिया, ताकि अवैध निर्माण के नाम पर लूटपाट किया जा सके
- -जिले की जनता का कहना है, कि अगर तीनों बीडीए के सदस्य सरकार और जनता के प्रति वाकई ईमानदार हैं, तो उन्हें 20 अवैध कालोनियों के मानचित्र स्वीकृति और सात लाख के किए गए भुगतान की जांच ही नहीं करानी होगी, अलबत्ता वित्तीय अनियमितता और करोड़ों का बंदरबांट करने वालों को जेल तक पहुंचाना होगा
बस्ती। अगर अब भी बीडीए के तीनों सदस्य नहीं जागे तो जनता उन्हें माफ नहीं करेगी और मान लेगी कि यह लोग भी उस पंकज पांडेय एंड टीम का हिस्सा रहें, जिन्होंने बीडीए और क्षेत्र की जनता को उनकी आंख में धूल झांेक कर करोड़ों लूटा, और बीडीए को बर्बाद कर दिया। जनता की नजर में यह सदस्य लोग 15 बैठकों में चाय और समोसा खाने के आलावा अन्य शायद ही कोई काम किया हो। इन लोगों का न तो विकास में और न बीडीए के भ्रष्टाचार को समाप्त करने में कोई खास योगदान रहा। जनता आज तक सदस्यों की उपयोगिता समझ ही नहीं पाई। बहरहाल, अभी भी इन लोगों के पास जनता और सरकार में छवि सुधारने का अवसर है। इनमें सबसे अधिक छवि सुधारने की आवष्यकता रामनगर ब्लॉक प्रमुख यशंकात सिंह को हैं, क्यों इन्हें अभी राजनीति में बहुत आगे जाना हैं, बाबा की तरह विधायक बनना है। जिले की जनता का कहना है, कि अगर तीनों बीडीए के सदस्य सरकार और जनता के प्रति वाकई ईमानदार हैं, तो इन्हें 20 अवैध कालोनियों के स्वीकृति मानचित्र
और सात लाख के किए गए भुगतान की जांच ही नहीं करानी होगी, अलबत्ता वित्तीय अनियमितता और करोड़ों का बंदरबांट करने वालों को सजा भी दिलवानी होगी। यह काम करना/करवाना सदस्यों के लिए बहुत कठिन नहीं हैं, बस इच्छा शक्ति और ईमानदारी होना चाहिए। क्यों कि यह सभी तीनों भाजपा के हैं, और सरकार भी भाजपा की है? इन्हें चाय और समोसा वाली छवि से बाहर आना होगा। सदस्यों को यह याद रखना होगा कि उन लोगों को ‘चाय समोसा’ में फंसाकर, पंकज पांडेय एंड टीम ने 20 अवैध कालोनियों के मानचित्र को स्वीकृति कर कालोनाइजर्स से करोड़ों कमाया। अवैध कालोनियों की मैपिंग के नाम पर बीडीए ने ‘रिमोट सेंसिगं एप्लीकेशन संेटर’ को सात लाख का भुगतान किया, सर्वे में 37 अवैध कालोनी सामने आया, लेकिन टीम ने सिर्फ 17 कालोनी को अवैध बताया और 20 अवैध कालोनी को छिपा लिया, बाद में भारी रकम लेकर सभी का मानचित्र अवैध रुप से स्वीकृति कर दिया, जिसमें टीम ने करोड़ों कमाया। बीडीए ने सर्वे करने वाली फर्म को तो पूरा भुगतान किया, लेकिन पंकज पांडेय एंड टीम ने सर्वे रिपोर्ट ही नहीं लिया, बिना सर्वे रिपोर्ट लिए सात लाख का भुगतान कर दिया, इसके पीछे की टीम की साजिश छिपी हुई थी। सर्वे रिपोर्ट अगर ले लिया होता तो सभी 37 कालोनाइजर्स के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ती, इस लिए सर्वे रिपोर्ट को ही नहीं लिया, और उसी की आड़ में पंकज पांडेय एंड टीम ने करोड़ों तो कमाया, साथ ही सात लाख का वित्तीय नुकसान भी किया, जो कि जांच का विषय है। पंकज पांडेय एंड टीम की चालाकी देख बड़े-बड़े दंग रह गए। बीडीए ने ‘रिमोट सेंसिगं एप्लीकेशन संेटर’ से अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए अवैध कालोनियों के अतिरिक्त आवास, होटर्ल, नर्सिंग होम सहित अन्य होने वाले प्रतिष्ठानों की मैपिंग के लिए 33.69 लाख का एग्रीमेंट किया, प्रथम किष्त के रुप में 16.84 लाख का चेक भी दिया, लेकिन उस चेक को पंकज पांडेय एंड टीम ने जानबूझकर इस लिए बाउंस करवा दिया, ताकि अवैध निर्माण के नाम पर लूटपाट किया जा सकें। फर्म लिखती रही, कि चेक बाउंस हो गया, इस लिए दूसरा चेक दिया जाए, ताकि अवैध निर्माण का सर्वे किया जा सके। फर्म ने बाउंस चेक को यह कहते हुए वापस कर दिया, कि आरटीजीएस किया जाए। हैरानी होती है, कि पांच साल हो गए, लेकिन एक भी कमिश्नर, डीएम और सचिव ने इस ओर देखा ही नहीं और न ही जांच करवाने की जरुरत ही महसूस किया। ऐसा लगता हैं, पंकज पांडेय एंड टीम का जादू अधिकारियों पर भी चढ़कर खूब बोला, तभी तो किसी ने जांच नहीं करवाया, हर बैठक में कमिश्नर को सिर्फ 17 अवैध कालोनियों के बारे में बताया जाता रहा, और हर बार कमिश्नर ध्वस्तीकरण का आदेश देते रहें, लेकिन आज तक एक भी कालोनी ध्वस्त नहीं हुई। बीडीए के सदस्यों को यही देखना है। बैठक में उन 37 अवैध कालोनियों का कोई जिक्र नहीं करता, जो सर्वे में आया, और जिसकी मैपिगं कराने के लिए बीडीए ने सात लाख खर्च किया। बीडीए के सदस्यों के अतिरिक्त जो अन्य नेता आवाज उठाते थे, और पंकज पांडेय को जेल भेजवाने को कहते थे, उनकी भी आवाज न जाने क्यों बंद हो गई? इसी का फायदा पंकज पांडेय एंड टीम ने खूब उठाया। शिकायत करके और यह कहते हुए शिकायत को निराधार बताने वाले नेताओं की कमी नहीं रही कि, किसी ने उनके पैड का दुरुपयोग किया। जिस जिले में ऐसे नेता और बीडीए सदस्य हों, उस जिले को हर कोई लूटना चाहेगा। अगर ऐसा नहीं होता तो एक अधिकारी यह न कहते कि उन्होंने बीडीए से इतना कमाया जितना वह पूरी जिंदगी नहीं कमा पाते।

Comments