भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी "परासी" की बुनियाद

भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी "परासी" की बुनियाद

भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी "परासी" की बुनियाद

  बनकटी /बस्ती। बार-बार सवाल उठ रहा है कि आखिर मनरेगा में हो रहें भ्रष्टाचार के मामलों में महिला प्रधान व सचिव क्यों आगे निकल रही है। इन सब को यह भी पता होगा की स्वयं जालसाजी में फंसते नजर आ रहें हैं। वैसे देखा जाए तो सिर्फ परासी ही नहीं बल्कि पूरे ब्लॉक भर में मनरेगा भ्रष्टाचार के मामले में महिला प्रधानों व महिला सचिवों का नाम आगे आ रहा है। एक तरह से देखा जाए तो इन लोगों द्वारा नारी सशक्तिकरण का मजाक उड़ाया जा रहा हैं? जिन महिलाओं को समाज में इज्जत की निगाह से देखा जाता है, उसे मनरेगा ने भ्रष्टाचारी बना दिया है। इन्हें बढ़ावा देने में शासन और प्रशासन के अधिकारी सहित बीड़ीओ का भी दोष है। सर्दी के रात्रि में औसत 70 मनरेगा श्रमिकों से जबरदस्ती काम कराया जा रहा है। इस काम के लिए ग्राम के प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक को नेशनल एवार्ड मिलना चाहिए। 

बता दे / परासी के प्रधान ने फर्जीवाड़ा करने का नया तरीका निकाल लिया है फिर भी पकड़ में आ गए। लगभग 1000 मजदूरों के नाम फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। रोजगार सेवक ने फर्जी हाजिरी भी लगाया है। औसत 70 श्रमिकों का मस्टरोल तो दिन में दस बजे निकला, मगर मजदूरों से काम रात्रि में करवाया गया जो कि श्रम कानून के विपरीत है। पहला फर्जी मस्टरोल छ: जनवरी से उन्नीस जनवरी तक मिट्टी पटाई कार्य और दूसरा मस्टरोल नौ जुलाई से बाइस जुलाई तक दिलीप के घर से राजकुमार के खेत के तरफ सीसी रोड निर्माण कार्य दिखाया गया है। जिसमें हर दिन हाजिरी रात्रि के लगभग नौ बजे लगाया गया। रात्रि में हाजिरी लगाने का मतलब रात्रि में काम होना, क्यों कि हाजिरी मोबाइल मानिटरिंग सिस्टम से लगता है। गांव वालों ने बताया कि जिन साइड के लिए मस्टरोल निकाला गया है उस पर एक वर्ष पहले काम हो गया है। किसी दिन मौके पर एक भी मजदूर काम करते हुए नहीं मिले। यही हाल सोलह जनवरी 26 का भी रहा जगदीशपुर गाव निवासी रामदीन ने बताया मैं प्रधान का ही आदमी हूं आज काम नहीं हो रहा है लोग नहाने चले गए हैं। जबकि उस दिन भी 65 मजदूरों की हाजिरी बिना काम कराए लगा दी गई। इस तरह 13 दिन में 1000 मजदूरों के नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ। इस बावत जब महिला सचिव अर्चिता द्विवेदी से बात किया गया तो प्रधान से मिलने की बात कहते हुए पटाक्षेप करने की बात कही।इस तरह आए दिन बनकटी ब्लॉक के ग्राम पंचायतों में कच्चे कार्यों को लेकर फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है, उससे यह साबित होता है. कि इस ब्लॉक को यूंही नहीं मनरेगा में फर्जीवाड़ा करने के लिए नंबर वन माना जाता है। सवाल उठ रहा है, कि रोज इतना बड़ा फर्जीवाड़ा निकल रहा है. ब्लॉक एवं जिले के अधिकारी सो क्यों रहें है ? इन लोगों को सोते रहने का कारण क्या है ?

 आज प्रधानों और रोजगार सेवकों की इतनी हिम्मत बढ़ गई कि वह रात्रि में भी हाजिरी लगा रहे है। कोई इनसे पूछे तो सही कि जब पूरी दुनिया सोती है, तो कैसे रात्रि में हाजिरी लगा दी जाती है। इस मामले में ग्राम पंचायत से लेकर ब्लॉक पूरी तरह सवालों के घेरे में है। रही बात असली और नकली प्रमुख की तो अगर, इन लोगों को इस योजना की इतनी ही चिंता होती तो आज ब्लॉक भ्रष्टाचार में नंबर वन पर नहीं होता। नकली प्रमुखों के हाथ में ब्लॉक है मगर इन्हें भी एक सच्चे नागरिक की तरह देखना चाहिए कि यह सब क्या हो रहा है। लोगों का कहना है, कि अगर बीडीओ और नकली प्रमुख चाह जाएं तो बहुत हद तक ब्लॉक की बिगड़ी छवि को सुधारा जा सकता है।

गरीब मजदूरों के हक पर डाका

यशोदा देवी, राम जनम, रेशमा देवी, शालू, जितेंद्र, सुरेंद्र, रंजू, राजदेव, सीमा, निशा,राम बेलास,अंजना,सुभागी,चंद्रभान, रामसकल, रामजी, महेंद्र, माधुरी, हरि प्रसाद, पूनम, सुनीता देवी, राजेंद्र, राधिका, संजू,संदीप कुमार,विकास, सुभावती,सुधा,आकाश, रीना, महिमा,रीमा,प्रीति गौतम,मदन चंद,अंकित कुमार यादव, सरवन कुमार भारती, राम कैलाश, रंगीलाल, अवधेश, प्रमिला देवी, फूलचंद, सीताराम, राम जनम, चंद्रभूषण, रेनू ,उषा देवी,रेनू, मीरा, कलावती, दयाराम, रविंद्र कुमार, भालचंद्र, गायत्री देवी, फूला देवी, गुड़िया,राजपति, राधिका, मनजीत,आरती, ज्योति, रामकेश,संगीता, प्रिया आदि अपठनीय नामों के साथ सत्तर लोगों के नाम मजदूरी प्रधान द्वारा बार-बार निकाला गया है। इनमें से कुछ ऐसे भी सम्मानित लोग होगें जो मनरेगा मजदूर नहीं है इन लोगों को चाहिए कि अपने नाम पर निकाले गए धन की जांच करवाते हुए मानहानि का मुकदमा पंजीकृत करावें। जो सचमुच में मनरेगा मजदूर है वह पूरे हक़ के साथ अपनी मजदूरी का प्रधान से मांग करें

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