चौकिएं मतः ‘650’ करोड़ ‘घोटाले’ का जिन्न ‘निकला’
- Posted By: Tejyug News LIVE
- राज्य
- Updated: 13 December, 2025 05:23
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चौकिएं मतः ‘650’ करोड़ ‘घोटाले’ का जिन्न ‘निकला’
-घोटालेबाजों का सच बताने और सरकार को नींद से जगाने के लिए संजय मिश्र नामक आम आदमी ने ‘पदयात्रा’ के जरिए दी योगीजी को चुनौती, पदयात्रा की शुरुआत मुख्यमंत्री के जनपद से की, पैरों में छाले पड़ गए, लेकिन पदयात्रा जारी रहा, पदयात्रा का स्वागत सरदार कुलवेंद्र सिंह ने किया और पद यात्रा की टीम रात्रि विश्राम बादशाह सिनेमा में किया
-बस्ती सहित अन्य जनपदों में प्रशासक और सचिव ने मिलकर किया इतना बड़ा घोटाला, घोटाले की जानकारी आईटीआई के तहत मिली, सवाल उठ रहा हैं, कि इतने बड़े घोटाले की जांच अभी तक सीबीआई को क्यों नहीं योगीजी ने सौंपा, और क्यों ने इतने बड़े को सपा सहित अन्य विपक्ष ने सदन में उठाया
-पंचायती निदेशक के सात पत्रों को एक भी डीएम ने अभी तक संज्ञान में नहीं लिया, जब कि घोटाला करने वाले प्रशासक और सचिवों की ग्रामवार सूची भी उपलब्ध कराया
-यह घोटाला एडीओ पंचायत, एडीओ, एजी, एडीओ समाजकल्याण, एडीओ सहकारिता और एडीओ आईएसबी, और सचिवों ने मिलकर 25 दिसंबर 21 से 25 मई 21 तक उस समय किया, जब पंचायत का चुनाव हो रहा था, और यह लोग प्रशासक बनाए गए थे
-पांच मई 21 को प्रधान चुने गए, और 25 मई को शपथ ग्रहण हुआ, लेकिन इस बीच 20 दिन में प्रशासकों और सचिवों ने ग्राम पंचायतों को कंगाल कर दिया, प्रशासकों ने सचिवों के साथ मिलकर बिना कोंई काम कराए करोड़ों रुपये का बंदरबांट कर लिया
-2021 में 58189 ग्राम पंचायतों के लगभग 58 हजार प्रधानों का हक पर नियुक्ति प्रशासक और सचिवों के द्वारा नियम विरुद्व बिना काम कराए आनन-फानन में 650 करोड़ उस धन को निकला जो प्रधानों को निकालना था
बस्ती। सरकार के सहयोगी दल के विधायक दूधराम ने मीडिया के सामने सच ही कहा था, कि कौन कहता है, कि प्रदेश में रामराज हैं, अगर रामराज होता तो हर जगह लूटपाट न होता। भले ही विधायकजी के बयान को भाजपा वालों ने हवा में उड़ा दिया हो, लेकिन जो सच विधायक दूधराम ने कहा, वह सच सामने आ रहा है। अगर पंचायत विभाग में मोदीजी के क्षेत्र बनारस, योगीजी के क्षेत्र गोरखपुर और सहित बस्ती अन्य जनपदों में 650 करोड़ का प्रमाणित घोटाला निकलता है, तो इसकी जबावदेही किसकी बनती है? वर्तमान में यह मलाईदार विभाग ओमप्रकाश राजभर के पास है। अपने आप को, अपनी पार्टी और अपने विधायकों को ईमानदारी का हर जगह एचएमबी रिकार्ड बजाने वाले कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के विभाग में अगर इतना बड़ा घोटाला होता है, और यह चुप रहते हैं, तो माना जाता है, घोटाले में इनकी सहमति और हिस्सेदारी दोनों होगी। अगर ऐसा नहीं होता तो इन्हें अब तक इसकी जांच सीबीआई से कराने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव रख देना चाहिए था, कहना गलत नहीं होगा कि न तो कैबिनेट मंत्री ईमानदार हैं, और न इनके विभाग के अधिकारी ही ईमानदार। रही बात योगीजी की तो अगर इनके जनपद से 650 करोड़ घोटाला को लेेकर संजय मिश्र पदयात्रा पर निकलतें हैं, तो सवाल तो योगीजी पर भी उठेगा। प्रदेश की जनता को घोटालेबाजों का सच बताने और सरकार को नींद से जगाने के लिए गोरखपुर से संजय मिश्र नामक आम आदमी ने ‘पदयात्रा’ की शुरुआत करके एक तरह से योगीजी को चुनौती दी है। बस्ती पहुंचते-पहुंचते इनके पैरों में इतने छाले पड़ गए, कि यह चल नहीं पा रहे थे, चप्पल पहनकर पदयात्रा पर निकले संजय मिश्र और उनकी टीम का स्वागत सरदार कुलवेंद्र सिंह ने किया और पदयात्रा की टीम रात्रि विश्राम बादशाह सिनेमा में किया। एक भेंट में इन्होंने कहा कि हमने सभी दलों के लोगों से पद यात्रा में शामिल होने को कहा, साथ में चलने को कौन कहे, कोई एक कदम साथ देने को तैयार नहीं, विपक्ष के लोग भी तैयार नहीं हुए। कहते हैं, कि पूरे जनपद से साक्ष्य एकत्रित करने में उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हुआ, जब आरटीआई के तहत सभी जनपदों की सूचना मिल गई, तब उन्होंने सीएम से सहित सभी को पत्र लिखा और संज्ञान में लेकर जांच कराने की मांग की। कहा कि उनके पत्र को संज्ञान में लेकर पंचायती निदेशक ने 18 अप्रैल 24 और चार अप्रैल 25 के बीच सभी डीएम को सात पत्र जारी किया, लेकिन एक भी डीएम ने न तो जांच कराया और न कोई कार्रवाई ही किया, जब कि यह घोटाला पूरी तरह प्रमाणित हैं, जिसके सारे साक्ष्य दिए जा चुके है। ग्रामवार घोटाले की जानकारी दी गई। बताया कि बस्ती सहित अन्य जनपदों में प्रशासक और सचिव ने मिलकर इतना बड़ा घोटाला किया। कहते हैं, कि सवाल उठ रहा हैं, कि इतने बड़े घोटाले की जांच अभी तक सीबीआई को क्यों नहीं योगीजी ने सौंपा? और क्यों नहीं इतने बड़े घोटाले को सपा सहित अन्य विपक्ष ने सदन में उठाया? कहा कि यह घोटाला एडीओ पंचायत, एडीओ, एजी, एडीओ समाजकल्याण, एडीओ सहकारिता और एडीओ आईएसबी, और सचिवों ने मिलकर 25 दिसंबर 21 से 25 मई 21 तक उस समय किया, जब पंचायत का चुनाव हो रहा था, और यह लोग प्रशासक बनाए गए थे, कहा कि पांच मई 21 को प्रधान चुने गए, और 25 मई को शपथ ग्रहण हुआ, लेकिन इस बीच 20 दिन में प्रषासकों और सचिवों ने ग्राम पंचायतों को कंगाल दिया, प्रशासकों ने सचिवों के साथ मिलकर बिना कोई काम कराए करोड़ों रुपये का बंदरबांट कर लिया। कहते हैं, कि 2021 में 58189 ग्राम पंचायतों के लगभग 58 हजार प्रधानों का हक पर, नियुक्ति प्रशासक और सचिवों के द्वारा नियम विरुद्व बिना काम कराए आनन-फानन में 650 करोड़ उस धन को निकला जो प्रधानों को निकालना था। पदयात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि वह छह दिसंबर 25 को गोरखपुर से पदयात्रा शुरु किया और आठ दिसंबर 25 को बस्ती पहुंचा। कहा कि वह रोज 15-20 किमी. की पदयात्रा करते हैं, और उनका 25 दिसंबर को राजधानी पहुंचने का लक्ष्य है।

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