प्रबंधक ‘हाजी मुनीर अली’ के ‘दामादों’ की ‘फैक्ट्री’ होगी ‘बंद’!

प्रबंधक ‘हाजी मुनीर अली’ के ‘दामादों’ की ‘फैक्ट्री’ होगी ‘बंद’!

प्रबंधक ‘हाजी मुनीर अली’ के ‘दामादों’ की ‘फैक्ट्री’ होगी ‘बंद’!

बस्ती/उत्तर प्रदेश

-नये आदेश के तहत अब कोई ‘प्रबंधक’ नहीं ‘खोल’ पाएगा ‘दामादों’ की ‘फैक्ट्री’, हाजी मुनीर अली जैसे अन्य प्रबंधकों को 24 दिसंबर 25 तक दामाद न होने का देना पड़ेगा शपथ-पत्र

-हाजी मुनीर अली के दामादों की नियुक्ति में सहयोग करने वाले और हाजी के गलत कामों पर पर्दा डालने तत्कालीन बस्ती के जिला अल्प संख्यक अधिकारी एसएन पांडेय हुए निलंबित

बस्ती। कप्तानगंज स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजुन्नवी के प्रबंधक हाजी मुनीर अली देश के पहले ऐसे मदरसे के प्रबंधक होगें, जिनके मो. बहार षाह, अब्दुल मुक्तबिर, साजिद अली, मो. अब्बास एवं मो. अकरम जैसे पांच दामाद मदरसे में षिक्षक के रुप में तैनात है। नये आदेष के क्रम में हाजी मुनीर अली के दामादों की फैक्ट्री बंद होने जा रही हैं, फैक्ट्री बंद होने से छठें दामाद को नियुक्त करने का प्रबंधक का सपना-सपना ही रह जाएगा, क्यों कि 24 दिसंबर 25 को सभी जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारियों को शासन में यह शपथ-पत्र देना होगा, कि उनके जिले के मदरसों में प्रबंधकों के कितने रिष्तेदार तैनात हैं, जैसे ही यह षपथ-पत्र षासन को मिलेगा, वैसे ही हाजी मुनीर अली के पांचों दामादों की छुटटी हो जाएगी। षासन की ओर से यह कार्रवाई उस गुलाम हुसैन के शिकायत पर हुई, जिसे हाजी ने अपने छठें दामाद की नियुक्ति के लिए इन्हें जबरिया बर्खास्त कर दिया था, मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है। खास बात यह है, कि हाजी मुनीर अली के दामादों की नियुक्ति में सहयोग करने और हाजी के गलत कामों पर पर्दा डालने वाले तत्कालीन बस्ती के जिला अल्प संख्यक अधिकारी एसएन पांडेय निलंबित हो चुके है।

छठें दामाद की नियुक्ति की जानकारी होने पर सरकार ने शपथ-पत्र देने वाला आदेश जारी किया। इस आदेश से हाजी मुनीर अली के दामादों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। आठ दिसंबर 25 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मदरसा शिक्षा परिषद को भेजे गए नवीन आदेश के अनुसार अब प्रदेश के सभी मदरसों की लेखा-परीक्षा एवं भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। परिषद ने 29 मई 2025 की बैठक में नई निरीक्षण समिति का गठन करते हुए स्पष्ट किया कि वर्ष 2025-26 के अंतर्गत सभी मदरसों की वित्तीय एवं प्रशासनिक जाँच अनिवार्य है। इन आदेशों का सीधा प्रभाव कप्तानगंज, जनपद बस्ती स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजुन्नवी पर भी पड़ रहा है, जो लंबे समय से परिवारवाद, अनियमित नियुक्तियों एवं वित्तीय विसंगतियों के आरोपों के कारण चर्चा में है। स्थानीय जनता द्वारा इसे “दामादों की फैक्ट्री” कहा जाता रहा है। इस संबध में भाजपा नेता राजेंद्रनाथ तिवारी के द्वारा समय-समय पर मुख्यमंत्री, मदरसा बोर्ड एवं जिला प्रशासन को लगातार पत्र भेजकर इस मदरसे की अनियमितताओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका। इसके बावजूद सीएम पोर्टल पर जिला प्रशासन ने इस मदरसे को “क्लीन चिट” दे दिया। अब मदरसा बोर्ड के नए आदेश के बाद स्वतः संदेह के दायरे में आ गई है। सरकार द्वारा अनिवार्य की गई नई जाँच मे लेखा रजिस्टर, छात्र उपस्थिति, शिक्षक नियुक्ति, अनुदान उपयोग, मान्यता संबंधी दस्तावेज, भौतिक सत्यापन आदि का पुनः निरीक्षण होगा। जाँच के बाद यदि अनियमिताएँ सिद्ध होती हैं तो मदरसा की मान्यता निलंबित, अनुदान रोका और प्रबंधन पर कार्रवाई की जा सकती है। भाजपा नेता की ओर से शासन और प्रशासन से जनहित में यह अपेक्षा की गई हैं, कि न केवल कप्तानगंज में बल्कि प्रदेश के सभी मदरसों में व्याप्त परिवारवाद और अनियमन पर कठोर कार्रवाई की जाए।

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