‘पेंशनर्स’ का आर्शिवाद ‘लीजिए’, बददुआएं ‘नहीं’!
- Posted By: Tejyug News LIVE
- राज्य
- Updated: 12 January, 2026 20:03
- 68
‘पेंशनर्स’ का आर्शिवाद ‘लीजिए’, बददुआएं ‘नहीं’!
बस्ती। सवाल उठ रहा है, कि आखिर ‘पेंशनर्स’ ही ‘क्यों’ बार-बार ‘ठगी’ का ‘शिकार’ हो ‘रहें’? कभी यह जिला कोषागार की ठगी का तो कभी अपर निदेशक कोषागार एवं पेंशनर्स की ठगी का शिकार हो रहे है। ऐसे लोग इनको ठग रहे हैं, जो खुद पेंशनर्स है। आखिर इनका कसूर क्या है? जिन लोगों को इन लोगों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए, वही संवेदनहीन होते जा रहंे हैं। ठगने वाले अनेकों, लेकिन दर्द सुनने वाला कोई नहीं। जब इनकी कोई सुनता तो यह लोग कार्यालय में बैठकर आपस में चाय के साथ दर्द को साझा कर लेते है। ऐसी बेचारगी अन्य वर्गो में नहीं देखी जाती। जिस तरह इन लोगों को खुले आम कार्यालय के भीतर बाबू ठगता तो कार्यालय के बाहर दलाल आंख गड़ाए रहते है। अपर निदेषक कोषागार एवं पेंशनर्स के यहां तो साहब के सामने ही पेंषन स्वीकृति करवाई 20 से 30 हजार लिया जा रहा है। साहब लोगों ने बकायदा बाहर अपने दलाल पाल रखे है। जीवनभर की पूंजी दलालों और बाबूओं के जेबों में चली जाती है, बड़े साहब से कहो तो सुनकर टाल देते है। जब कोई नहीं सुनता तो यह 70-80-90 साल की उम्र में दरी बिछाकर अपनी आवाज को शासन और प्रशासन को सुनाने का प्रयास करते, अधिक से अधिक लोगों तक अपनी आवाज पहुंचा सके, इसके लिए यह अखबार के कार्यालयों में जाते हैं, और दो-चार सौ रुपया देकर विज्ञप्ति छपवाते है। यह तो मीडिया की देन हैं, कि इनकी समस्याएं शासन, प्रशासन और जनता तक पहुंच जाती है। मीडिया ही एक ऐसा वर्ग हैं, जिनसे पेंशनर्स को कोई शिकायत नहीं। बल्कि यह लोग मीडिया को बुलाकर चाय पिलाते हैं, कुछ लोग ऐसे भी है, जब वह नौकरी में थे, तो होली और दीपावली को आवास पर मिठाई का डिब्बा लेकर जाते। मीडिया की हमदर्दी इन लोगों के प्रति सदैव रही है। नेता भी इनकी बहुत अधिक नहीं सुनते, जिन नेताओं की इन लोगों ने जीवनभर सेवा किया, गलत और सही काम किया, वह भी मदद करने को तैयार नहीं। बहुत कम ऐसे परिवार होगें, जहां इन्हें पहले की तरह मान और सम्मान मिलता हो। नाती-पोता, बहु और बेटे का प्यार न मिले तो बचीखुची जिंदगी काटना मुस्किल हो जाता है। जो किस्मत वाले होते हैं, उन्हें सबकुछ मिल जाता, लेकिन जो नहीं होते उन्हें बहु का भी प्यार और स्नेह नहीं मिलता। जिन बच्चों के लिए यह लोग जिंदगी भर की पूंजी लुटा देते हैं, वही बच्चे कभी-कभी इन्हें अकेला छोड़ जाते हैं, साथ रह जाती पत्नी। लेकिन इनमें भी बहुत से ऐसे होगें, जिनकी पत्नी भी साथ छोड़कर भगवान के पास चली जाती। रह जाते अकेला। जीवनभर दूसरों की जरुरत को पूरा करने वाले इस वर्ग के लोगों की जब सबसे अधिक जरुरत होती तब उन्हें नहीं मिलता। जिस तरह बच्चों का बुढ़े मां-बाप का नजरिया बदल रहा है, उसे देखते हुए यही सलाह दी जा रही है, सबकुछ बच्चों का भविष्य बनाने में मत लुटाइए, अपने भविष्य के लिए भी बचाकर रहिए। जब कोई काम नहीं आएगा तो आप की मेहनत की कमाई ही काम आएगी। मीडिया उन लोगों से अपील करती है, जो लोग पेंशनर्स को ठगी का शिकार बनाते है। पूरा जिला और कार्यालय लूट लीजिए, लेकिन पेंशनर्स को छोड़ दीजिए। इनका आर्शिवाद लीजिए, इनकी बददुआएं मत लीजिए। वरना हमेशा दुखी रहेगें, बुरे वक्त में परिवार और समाज का साथ नहीं मिलेगा। एंटी करप्षन वाले पकड़कर ले जाएगें।

Comments