‘सचिव जी’ यह ‘धन्ना सेठों’ की नहीं, ‘समाज’ सेवा ‘की’ संस्था!

‘सचिव जी’ यह ‘धन्ना सेठों’ की नहीं, ‘समाज’ सेवा ‘की’ संस्था!

‘सचिव जी’ यह ‘धन्ना सेठों’ की नहीं, ‘समाज’ सेवा ‘की’ संस्था!

बस्ती। रेडक्रास सोसायटी की दो जनवरी 26 को होने वाली पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्यों की पहली बैठक से पहले ही सवाल खड़े होने लगे। अनेक सदस्यों और पदाधिकारियों का कहना है, कि भाई यह रेडक्रास सोसायटी संस्था हैं, कोई धन्ना सेठों की संस्था नहीं हैं, बल्कि समाज सेवा वाली संस्था है। सदस्यों का कहना है, कि अगर यही बैठक होटल के बजाए कलेक्टेट सभागार में होती तो रेडक्रास सोसायटी के धन का दुरुपयोग नहीं होता। जो बैठक एक सभागार में या फिर प्रेस क्लब में हो सकती थी, वह बैठक क्यों होटल में आयोजित की जा रही है। दूसरा सवाल यह उठ रहा है, कि बिना अध्यक्ष के कार्यकारिणी की बैठक नहीं बुलाई जा सकती। ऐसा लगता है, कि मानो बैठक बुलाने से पहले इस पर होमवर्क नहीं किया गया। अगर किया गया होता तो सवाल न खड़े होते। पता नहीं नई कार्यकारिणी को विवादों में रहना इतना क्यों पसंद है। मानो विवादों से पदाधिकारियों का कोई गहरा संबध हो, तभी तो विवाद पैदा होते रहते है। सचिव रेडक्रास सोसायटी के सचिव रंजीत श्रीवास्तव की ओर से जारी बैठक की सूचना में कहा गया है, कि यह बैठक रेडक्रास की गतिविधियों को सक्रिय रुप से आगे बढ़ाने एवं समाज में रेडक्रास को सकारात्मक दिशा देने के लिए दो जनवरी 26 को होटल प्रकाश में शाम छह बजे से सात बजे तक आहुत किया गया। बैठक का मकसद रेडक्रास सोसायटी को गतिशील देने के लिए सदस्यों का विचार आवष्यक है। ताकि रेडक्रास के कार्यो को सकारात्मक गति प्रदान की जा सके। बेैठक कराने की पहल का स्वागत हो रहा हैं, कहरा जा रहा है, कि सभी सदस्यों की मंशा रेडक्रास के जरिए समसज के गरीबों एवं असहाय लोगों की सहायता करना है। रेडक्रास के जरिए जितनी भी असहाय लोगों की मदद होगी उतना ही रेडक्रास सोसायटी का मकसद हल होगा। रेडक्रास सोसायटी के जिम्मेदारों का इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा, कि रेडक्रास सोसायटी के धन का दुरुपयोग न होने पाए। क्यों कि आज भी रेडक्रास सोसायटी से जुड़कर लोग अपने आप को गौरन्वित महसूस करते है। यह सबकी जिम्मेदारी है, कि रेडक्रास सोसायटी पर कोई अगुंली न उठा सके। यह संस्था किसी एक व्यक्ति या कुछ लोगों से नहीं बल्कि उन सैकड़ों लोगों के अटूट विष्वास और आत्मीय संबध होने के कारण चल रहा है, यह वही लोग हैं, जिन्हांेने कोराना काल में भी अपनी जान की परवाह किए बिना जरुरतमंदों की मदद कली। यह वही लोग हैं, जो हमेशा तन, मन और धन से असहायों एवं गरीबों की मदद करने के लिए तैयार रहते है।

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