बूढ़े ‘मां-बाप’ के लिए ‘वरदान’ बना ‘एसआईआर’!
- Posted By: Tejyug News LIVE
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- Updated: 29 December, 2025 19:56
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बूढ़े ‘मां-बाप’ के लिए ‘वरदान’ बना ‘एसआईआर’!
- -जिस मां-बाप ने बेटे के जिंदा होने की आस छोड़ दी थी, उसे एसआईआर ने 25 साल बाद जिंदा वापस मिला दिया
- -25 साल पहले घर से नाराज होकर बढ़नी निवासी गुरुदत्त मिश्र का जवान बेटा अवनीष मिश्र कहीं चला गया था, बेटे को मां-बाप ने बहुत खोजा, लेकिन नहीं मिला, मान लिया कि बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा
- -अचानक जब बेटे को एसआईआर में मां-बाप के डिटेल की आवष्यकता हुई, तो उसे मां-बाप याद आ गए, नेट से प्रधान का मोबाइल नंबर तलाशा, प्रधान से बात किया, फिर वह 24 दिसंबर 25 को गांव वापस आया
- -अपने बेटे को जिंदा देख मां-बाप और गांव वालों के आंख में आसूं आ गए, बेटे ने अब शादी भी कर ली और दो बच्चे भी है
बस्ती। एसआईआर से नेताओं को भले ही परेशानी हो रही है, और उनके लिए एसआईआर अभिषाप साबित हो रहा है, लेकिन ऐसे लोग भी है, जिनके लिए एसआईआर वरदान साबित हो रहा है। इन्हीें में एक हैं, कप्तानंगज विकास खंड के ग्राम बढ़नी के गुरुदत्त मिश्र। इनका बेटा अवनीश मिश्र लगभग 25 साल पहले घर से नाराज होकर कहीं चला गया। मां-बाप ने बहुत तलाशा, लेकिन न तो बेटे का पता मिला और न बेटा ही। परिवार जब थकहार गया तो यह सोचकर शांत बैठ गया, कि अब उनका बेटा नहीं मिलेगा। अगर कहीं होता तो अवष्य घर आता। जाहिर सी बात हैं, कि अगर कोई 25 साल तक घर नहीं आता तो यह मान लिया जाता है, कि बेटा अब उसके भार्ग्य में नहीं रहा। लेकिन बूढ़े मां-बाप को क्या मालूम था, कि उसका बेटा एसआईआर के जरिए मिल जाएगा। क्या दुनिया का कोई भी मां-बाप यह सोच सकते हैं, कि जिसे उन लोगों ने मरा हुआ मान लिया था, एक दिन वह उनके सामने आ जाएगा। बेटे के पिता गुरुदत्त मिश्र कहते हैं, कि उन लोगों ने बेटे के मिलने की आस ही छोड़ चुके थे, लेकिन धन्य हो एसआईआर का जिसने बेटे से 25 साल बाद मिला दिया। बेटा उत्तराखंड के ऋषिकेष से छह किमी. दूर अपना कारोबार कर रहें। कहते हैं, कि अगर एसआईआर न होता तो शायद उनका बेटा भी नहीं मिलता। जब बेटा नाराज होकर गया था, तो उसकी षादी नहीं हुई थी, अब तो उसकी षादी भी हो गई और दो बच्चे भी हो गए। बेटे से मिलना मां-बाप के लिए किसी सपने से कम नहीं रहा। हुआ यह कि जब एसआईआर हुआ तो मां-बाप के डिटेल आवष्यकता पड़ी। अविनाश मिश्र उन्हीं मतदाताओं में से हैं, जो बिना मां-बाप के वोटर बन गए। नेट पर इन्होंने प्रधान का नंबर तलाषा, फिर प्रधान से संपर्क किया, और परिवार के बारे में पूछा, फिर 24 दिसंबर 25 को वह 25 साल बाद गांव लौट आया। गुरुदत्त मिश्र, सपा नेता स्व. चंद्रभूषण मिश्र के समधी है। बार-बार कहा जाता है, कि अगर एसआईआर नहीं होता में मंडल में पांच लाख से अधिक फर्जी वोट नहीं कटते। यह भी सही है, कि अगर एसआईआर न होता तो गुरुदत्त मिश्र का बेटा न मिलता। एसआईआर ने न जाने कितने बच्चों को मां-बाप से मिला दिया। यह एसआईआर ही है, जिसके चलते यह पता चला कि जिले में लगभग डेढ़ लाख मतदाता स्थाई रुप से दूसरे स्थानों पर शिफट हो चुके है। एसआईआर के चलते ही अब विधानसभा में 19 लाख के स्थान पर 14.90 लाख ही मतदाता वोट कर सकेगें।

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