बिना ‘मां-बाप’ के ‘बन’ गए ‘1.33’ लाख ‘वोटर्स’
- Posted By: Tejyug News LIVE
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- Updated: 20 December, 2025 03:49
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बिना ‘मां-बाप’ के ‘बन’ गए ‘1.33’ लाख ‘वोटर्स’
बस्ती। चौकिएं मत! इसे आप लोग दुनिया का आठंवा अजूबा भी कह सकते हैं, कि जिले में एम लाख 33 हजार से अधिक ऐसे वोटर्स हैं, जिनके मां-बाप का पता ही नहीं, यानि यह सभी बिना मां-बाप के वोटर्स बन गए। हैं, न हैरान और चौकाने वाली बात। जो लोग एसआईआर का विरोध कर रहे हैं, और कर रहे थे, और जिनकी समझ में एसआईआर का मतलब नहीं आ रहा था, अब उन्हें समझ में आ गया होगा, कि यह एसआईआर किसी विशेष वर्ग या फिर विरोधी पार्टी के मतदाताओं का नाम काटने के लिए नहीें बल्कि फर्जी मतदाताओं की छटनी करने के लिए कितना जरुरी था। अगर एसआईआर नहीं हुआ होता तो बस्ती के लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि उनके जिले में एक लाख 32 हजार 292 ऐसे मतदाता है, जिनके मां-बाप का पता ही नहीं, यानि यह सभी बिना मां-बाप के मतदाता बन गए, कैसे बन गए? और इनके माता-पिता कहां हैं? यह जानने और उन्हें बीएलओ के सामने प्रस्तुत करने के लिए मतदाताओं को नोटिस भेजी जा रही है, अगर इन लोगों ने अपने मां-बाप को प्रस्तुत नहीं किया तो सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकता है। यह लोग एसआईआर से पहले तक वोट भी करते रहे। यह भी सही है, कि अगर एसआईआर न हुआ होता तो तीन लाख चार हजार 283 फर्जी मतदातओं का पता ही नहीं चलता। यह भी पता नहीं चलता कि 58352 मतदाता जीवित न होते हुए भी मतदान कर रहे थे। इस मामले में एसआईआर में लगे कर्मचारी और अधिक बधाई के पात्र है। इन लोगों के कार्यो की जितनी भी प्रसंशा की जाए कम होगा। पूरा प्रशासन बधाई का पात्र है।
एसआईआर ने एक तरह से जिले के मतदाताओं के बारे में सच बताने का काम किया। अब जरा अंदाजा लगाइए कि अभी तक जिले के 19 लाख से अधिक मतदाता वोट करते आ रहें, लेकिन एसआईआर के बाद अब 15 लाख 96 हजार से अधिक ही मतदाता वोट कर पाएगें। तीन लाख चार हजार 283 मतदाताओं पर व्यय हो रहे खर्चा भी बचेगा और प्रशासन के लिए चुनाव कराना भी आसान होगा। यही वह फर्जी मतदाता रहे, जिन्होंने किसी के हार और जीत में महत्वपूर्ण भूमिका अदा किया। जहां पर कुछ सौ और कुछ हजार पर हारजीत होता है, वहां पर तीन लाख फर्जी मतदाताओं का होना अपने आप में ही बड़ा सवाल खड़ा करता है। यह भी सही है, कि इन्हीं फर्जी वोटर्स के बल पर अनेक प्रत्याशी चुनाव जीतने की रणनीति बनाते रहें है। 16 फीसद से अधिक फर्जी मतदाताओं का जिले में होना बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है। बस्ती सदर विधानसभा में 20.55 फीसद फर्जी वोटर का मिलना हैरान करने वाला है। यही वह विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां से भाजपा प्रत्याशी की हार मात्र 15-16 सौ वोटों से हुई थी। अगर इस विधानसभा में सबसे अधिक 75669 वोट फर्जी निकलता है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार? प्रत्याशी या फिर बीएलओ? जिन बीएलओ 75669 फर्जी वोटों को काटा उन्हीं बीएलओ ने फर्जी वोट बनाए भी होगें। इस आकड़े के बाद अब फर्जी वोटरों के सहारे चुनाव जीतने की रणनीति बनाने वालों को अपनी रणनीति बदलनी होगी।
जो आकड़े अभी तक सामने आएं हैं, वह काफी चौकाने और हैरान करने वाला है। सबसे अधिक हैरान और चौकाने वाले वे एक लाख 33 हजार का आकड़ा है,जो बिना मां-बाप के वोटर्स न जाने कैसे बन गए। इन सभी वोटर्स को मां-बाप को सामने लाने के लिए नोटिस जारी हो रही है, जो बिना मां-बाप के मतदाता बने हैं, उनमें सबसे अधिक सदर के 26989, हर्रैया के 26816, महादेवा के 26802, कप्तानगंज के 26106 एवं रुधौली विधानसभा में सबसे कम 25579 मतदाता हैं। यह सभी वोटर्स तो मिल गए, लेकिन इनके माता-पिता नहीं मिले। एक और आकड़ा रोचक रहा, पहले चरण में लगभग दो लाख मतदाता फर्जी मिले, अब यह आकड़ा बढ़कर तीन लाख चार हजार 283 हो गया। इनमें सबसे अधिक बस्ती सदर में 75669 कुल वोटर्स की संख्या का 20.55 फीसद, रुधौली में 65345 यानि 15.04 फीसद, हर्रैया में 58054 यानि 15.15 फीसद, महादेवा में 53034 यानि 14.68 एवं सबसे कम कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में 52181 यानि कुल वोटर्स की संख्या का 14.34 फीसद है। 58352 वोटर्स ऐसे मिले, जिनका नाम तो मतदाता सूची में हैं, लेकिन वे मृत पाए गए, इनमें सबसे अधिक बस्ती सदर में 12531, रुधौली में 12097, हर्रैया में 11589, महादेवा में 11443 और कप्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम 10692 है। कहा जाता है, कि सबसे अधिक फर्जी वोटर्स मदरसों दारुलउलूम और मस्जिदों में ही पाए गए, मदरसों और दारुलउलूम में पढ़ने वाले बच्चों को भी वोटर्स बना दिया गया था। यह वोटर्स किस पार्टी के हैं, यह लिखने की नहीं बल्कि समझने की बात है। 58365 वोटर्स तो मिले ही नहीं, इनमें सबसे अधिक बस्ती सदर में 23264, रुधौली में 13478, हर्रैया में 9072, महादेवा में 6869 और कप्तानगंज में सबसे कम 5682 मतदाता है। 149335 मतदाताओं के बारे में पता चला कि वह कहीं और शिफट कर गए, इनमें सबसे अधिक बस्ती सदर में 32847, हर्रैया में 30734, रुधौली में 30389, कप्तानगंज में 29389 और सबसे कम महादेवा में 25976 मतदाता है। 35998 ऐसे वोटर्स मिले जिनका नाम दो स्थानों पर है, यानि यह दो जगहों से वोट कर रहे थे, इनमें सबसे अधिक रुधौली में 8777, महादेवा में 8088, हर्रैया में 6495, बस्ती सदर में 6426 और सबसे कम कप्तानगंज में 6212 मतदाता। 2233 ऐसे मतदाता सामने आए जिनका पता ही नहीं चला, जिसे गैरहाजिर की श्रेणी में डाल दिया गया, इनमें सबसे अधिक महादेवा में 658, रुधौली में 604, बस्ती सदर में 601, कप्तानगंज में 206 और सबसे कम हर्रैया में 164 मतदाता। उक्त आकड़े घट और बढ़ भी सकते है। सही आकड़ा 30 दिसंबर के प्रकाशन के बाद पता चलेगा। यह आकड़ा 19 दिसंबर 25 के सुबह 10 बजे तक का है। अब 19 लाख 430 के स्थान पर 15 लाख 96 हजार 168 ही मतदाता 2027 में वोट कर पाएगें, यानि अगर एसआईआर नहीं हुआ होता तो तीन लाख चार हजार 283 फर्जी मतदाता वोट करते, अब लोगों की समझ में एसआईआर के महत्व का पता आ गया होगा।

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