‘गुरुजी’ पढ़ाना ‘छोड़िए’, ‘जाइए’ कुत्ता ‘पकड़िए’
- Posted By: Tejyug News LIVE
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- Updated: 2 January, 2026 19:51
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‘गुरुजी’ पढ़ाना ‘छोड़िए’, ‘जाइए’ कुत्ता ‘पकड़िए’
बस्ती। जिले के हजारों गुरुजी के लिए खुश करने वाली खबर कहें या अपमानित होने वाली। अब उन्हें बच्चों को पढ़ाना नहीं पड़ेगा, बल्कि कुत्ता पकड़ना होगा। गुरुजी बच्चों को पढ़ाने के बजाए अब कुत्ता पकड़ेगें। यह हम नहीं बल्कि सरकार कह रही है। अगर नहीं पकड़े तो निलंबन तक की कार्रवाई हो सकती है। सवाल उठ रहा है, बच्चों को पढ़ाना जरुरी है, कि कुत्ता पकड़ना। सरकार की निगाह में तो पढ़ाना उतना जरुरी नहीं जितना कुत्ता पकड़ना जरुरी। आखिर सरकार गुरुजी लोगों को समझती क्या? जो काम सफाई कर्मी और नगर निकाय का हैं, सरकार उस काम को शिक्षकों से करवाना चाहती है। सवाल उठ रहा है, कि क्यों सरकार गुरुजी लोगों को हीनभावना से ग्रसित करना चाहती? जिन गुरुजी को समाज सबसे अधिक सम्मान देता है। सरकार उन्हीं से कुत्ता पकड़वा रही। गुरुजी कुत्ता पकड़ने लगेंगे तो समाज में उनकी क्या इज्जत रह जाएगी? ऐसे में क्या बच्चे गुरुजी का पैर छुकर आशीर्वाद लेगें? समाज से सबसे अधिक गुरुजी लोगों की बदनामी होगी, परिवार के सामने अपमानित होना पड़ेगा, पत्नियां कभी नहीं चाहेगी कि समाज उनके पति को कुत्ता पकड़ने वाला कहे। कोई भी पत्नी यह कभी स्वीकार नहीं करेगी कि 80-90 हजार कमाने वाला उसका पति कुत्ता पकड़े। गुरुजी लोगों की इज्जत ससुराल में भी कम हो जाएगी। ससुराल वाले अपने गुरुजी दामाद का आवभगत और इज्जत पहले जैसा नहीं करेगें। ऐसा लगता है, कि मानो सरकार की मंशा शिक्षकों को समाज, स्कूली बच्चे, परिवार और ससुराल हर जगह अपमानित करवाने की है। वैसे भी सरकार पहले से ही गुरुजी लोगों से पठन-पाठन छोड़कर अन्य कार्य करवा रही है। एक कुत्ता ही पकड़ना रह गया था, उसे भी करवाने जा रही है। कुत्ता पकड़ने का काम मदरसे वाले भी करेगें। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारियों की ओर से बाकायदा सभी प्रधानाचार्यो, प्रभारी प्रधानाचार्यो, प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, मान्यता प्राप्त इंटरकालेज एवं मदरसे को एक आदेश जारी किया गया हैं, जिसमें यह कहा गया है, कि उच्चतम न्यायालय में योजित सु-मोटो रिट पिटीशन सिविल इन री सिटी हाउंड बाई स्टे किड्स पे प्राइस के तहत जारी सात नवंबर 25 के तहत कार्रवाई करने के निर्देष दिए गए है। जिसमें सभी को यह निर्देशित किया जाता है, कि विधालय परिसर की स्वच्छता और आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए अपने-अपने विधालय से एक अध्यापक को नोडल अधिकारी नामित करें, और उनका संपर्क नंबर आवागमन के मुख्य स्थानों पर प्रदर्शीत करें। अब जरा अंदाजा लगाइए कि किसी गुरुजी का संपर्क नबर और नाम हर चौराहे, कस्बा पर यह लिखा मिले कि यही कुत्ता पकड़ने वाले गुरुजी हैं, तो आप समझ सकते हैं, कि वह गुरुजी समाज में कैसे सिर उठाकर चलेगें। यानि गुरुजी लोगों को अब विधालय के गेट पर कुर्सी लगाकर और डंडा लेकर बैठना होगा, ताकि अगर कोई कुत्ता विधालय परिसर में प्रवेश करें तो उसे वह पकड़ सकें। अगर कहीं कुत्ते ने पलटवार कर गुरुजी पर हमला कर दिया तो गुरुजी कहीं मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहेगें। कहने का मतलब सरकार प्रत्येक विधालय के एक शिक्षक को हर माह इस लिए 80-90 हजार वेतन देगी, ताकि वह गेट पर चौकीदार की तरह रखवाली करें, और कुत्तों के प्रवेश को रोकें। सरकार ने कुत्ता पकड़ने के लिए गुरुजी लोगों को प्रशिक्षण ही नहीं दिया, और न कोई कैटल केैचर ही उपलब्ध कराया, अगर कोई पागल और आवारा कुत्ता काट ले तो उसके उपचार की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। वैसे भी साइकिल से चलने वाले गुरुजी के पीछे-पीछे कुत्ता भों-भों करता रहता है। सरकार को यह सोचना चाहिए कि नगर क्षेत्र, सांउघाट, सदर ब्लॉक और बहादुरपुर ब्लॉक का आंशिक क्षेत्र के 99 फीसद स्कूलों में शिक्षक के रुप में सैकड़ों महिलाएं ही कार्यरत् है। क्या महिलाएं भी कुत्ता पकड़ने और गेट पर रखवाली का काम करेंगी? क्या वह कर पाएगी? कुछ ऐसे विधालय भी हैं, जहां पर एक या दो गुरुजी तैनात है। न जाने कितने ऐसे मदरसे और विधालय हैं, जहां पर गेट ही नहीं है। इन सबको को अगर छोड़ भी दिया जाए तो बीएसए स्कूल पूरी तरह खुला हुआ है, और जहां पर हर वक्त एक दर्जन से अधिक कुत्तों का जमावड़ा देखा जा सकता है। सबसे अधिक गंदगी यही पर ही मिलती है। शिक्षक संघ के जिला मंत्री बाल कृष्ण ओझा कहते हैं, इनको लेकर जिले भर शिक्षक विरोध जता रहे हैं, और कह रहे हैं, जब शिक्षक कुत्ता पकड़ने जाएगें तो बच्चों को पढ़ाएगा कोैन? और जब बच्चे पढ़ेगें नहीं तो डीएम और एसपी कैसे बनेगें? सरकार को इस अव्यवहारिक आदेश को त्वरित वापस लेना चाहिए, ताकि शिक्षक समाज में इज्जत के साथ सिर उठा कर चल सके।

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