प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को आरटीई के तहत 25 फ़ीसदी मुफ्त शिक्षा योजना जमीन पर लागू करे सरकार: सोकेन्द्र बालियान

प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को आरटीई के तहत 25 फ़ीसदी मुफ्त शिक्षा योजना जमीन पर लागू करे सरकार: सोकेन्द्र बालियान

पानीपत/ हरियाणा

प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को आरटीई के तहत 25 फ़ीसदी मुफ्त शिक्षा योजना जमीन पर लागू करे सरकार: सोकेन्द्र बालियान

सुप्रीम कोर्ट के आरटीई फ़्री शिक्षा पर आए ऐतिहासिक निर्देशों का 360 डिग्री सेवा समाधान संस्था ने किया स्वागत।

360 डिग्री सेवा समाधान मिशन, भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 13 जनवरी को बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दिए गए ऐतिहासिक निर्देशों का स्वागत करता है। यह निर्णय देश के करोड़ों गरीब, वंचित एवं कमज़ोर वर्ग के बच्चों के लिए समान शिक्षा के अधिकार को सशक्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारों, स्थानीय प्राधिकरणों और आस-पड़ोस के सभी प्राइवेट (गैर-सहायता प्राप्त) व विशेष श्रेणी के स्कूलों की यह संवैधानिक व कानूनी ज़िम्मेदारी है कि वे कक्षा 1 या प्री-प्राइमरी स्तर पर कम से कम 25% सीटें समाज के कमज़ोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखें। ऐसा न करना न केवल RTE अधिनियम बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21A का भी उल्लंघन होगा।

माननीय जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा एवं जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ द्वारा यह कहा जाना कि इस प्रावधान के ईमानदार क्रियान्वयन में समाज की संरचना बदलने की असाधारण क्षमता है, देश के भविष्य के लिए अत्यंत आश्वस्तकारी है। यह आदेश शिक्षा को केवल कल्याणकारी योजना न मानकर एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में स्थापित करता है।

360 डिग्री सेवा समाधान मिशन के अध्यक्ष सोकेन्द्र बालियान ने कहा कि - 

गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित करना सामाजिक अन्याय है।

25% आरटीई कोटा केवल काग़ज़ी प्रावधान न रहकर ज़मीन पर लागू होना चाहिए।

अभिभावकों को आसान, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय व राहत मिलनी चाहिए।

हम केंद्र व राज्य सरकारों, शिक्षा विभागों, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) तथा सभी स्कूल प्रबंधन समितियों से अपील करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का तत्काल और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही, हम समाज के सभी जागरूक नागरिकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से आग्रह करते हैं कि वे गरीब बच्चों के शिक्षा अधिकार की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

शिक्षा से ही समानता, सशक्तिकरण और सशक्त भारत का निर्माण संभव है।

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