बड़े साहब, ‘चपरासी’ की ‘चाय’, और ‘फोरमैन’ का ‘काफी’ पीतें!

बड़े साहब, ‘चपरासी’ की ‘चाय’, और ‘फोरमैन’ का ‘काफी’ पीतें!

बड़े साहब, ‘चपरासी’ की ‘चाय’, और ‘फोरमैन’ का ‘काफी’ पीतें!

बस्ती। मंडलीय अधिकारियों का स्तर इतना गिर गया है, कि अब उन्हें चपरासी की चाय और फोरमैन का काफी पीने में भी शर्म नहीं आती। जिस फोरमैन ने कभी खुद काफी न पिया हो, उसे वेतन से साहब को पिलाना पड़ रहा है। वह भी एक ईमानदार कहे जाने वाले फोरमैन की। यह उस मंडलीय अधिकारी का सच है, जो आईटीआई के बच्चों की वजीफा को मंजूरी देने के नाम पर प्राइवेट आईटीआई के संचालकों ने प्रति आईटीआई पांच हजार की मांग करते, जो नहीं देता उसका फारवर्ड ही नहीं करते। मजबूरी में संचालकों को पांच हजार हर साल देना पड़ता, क्यों कि इसी वजीफे के पैसे से आईटीआई का संचालन होता है, और वजीफा के लालच में बच्चे एडमिशन कराते है। चाय, काफी और वजीफा के चलते संयुक्त निदेशक बस्ती मंडल कौशल मिशन एवं शिक्षुक राष्टीय आईटीआई एके राना साहब, मंडल में काफी चर्चित हो गएं है। इनके लूटमार प्रवृत्ति के कारण आईटीआई के संचालकों के द्वारा राजधानी में धरना-प्रदर्शन किया जा चुका है। कुछ दिन तक मामला शांत रहा, लेकिन फिर लूटमार शुरु हो गया।

सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच है, कि संयुक्त निदेशक बस्ती मंडल कौशल मिशन एवं शिक्षुक राष्टीय आईटीआई एके राना, चपरासी की चाय और फोरमैन के वेतन के पैसे से काफी पीते है। साहब, चाय और काफी बड़ेबन स्थित बीटेक चाय वाला के यहां का ही पीते है। कुछ दिन तो चाय और काफी निःशुल्क पीते रहे, लेकिन जब चाय और काफी पिलाने वालों को यह लगने लगा कि इस साहब का स्तर तो बहुत ही नीचा, उसके बाद से चपरासी ने चाय पिलाना और फोरमैन ने काफी पिलाना बंद कर दिया। कहा तक एक चपरासी और फोरमैन चाय और काफी पिलाएगें। साहब, ठहरे महा कंजूस, चाय और काफी पीना ही बंद कर दिया। बताते हैं, कि यह साहब पष्चिम से आए हैं, हालांकि पष्चिम वाले अधिकारियों का स्तर इतना नहीं गिरा रहता। बरेली से बस्ती मंडल में इनका तबादला प्रशासनिक आधार पर हुआ। इन्होंने खुद की चार पहिया वाहन को विभाग में किराए पर लगा रखा है। गाड़ी भले ही दूसरे के नाम की है, लेकिन मालिक यही है। यह परीक्षा देने वाले बच्चों से भी 200-300 रुपया लेते है। प्राइवेट आईटीआई के निरीक्षण के नाम पर अलग से शोषण करते है। कहने का मतलब पैसा कमाने का यह कोई मौका हाथ से नहीं जाना देना चाहते। बता दें कि जिले में कुल 29 प्राइवेट आईटीआई संचालित हो रहे है। इसमें एक आईटीआई पिंटू बाबा का भी बताया जाता है। बताते हैं, कि अगर सरकार बच्चों का एडमिषन फीस जो 18500 होता है, उसे वजीफे के रुप में वापस न करे, तो प्राइवेट आईटीआई का संचालन ही बंद हो जाए। वजीफा की लालच में आईटीआई चल रहा है, और बच्चे एडमिशन लेते है। 99 फीसद संचालक यह कर बच्चों का एडमिशन करते हैं, कि जो पैसा साल भर का दोगें, वह वापस मिल जाएगा। जिन बच्चों के पास पैसा नहीं रहता, उसका यह लोग अपने पास से जमा कर लेतें हैं, और जब वजीफा मिलता है, तो वह पैसा वापस ले लेते है।

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