हे, ‘भगवान’ अगले ‘जन्म’ में मोहे ‘शिक्षक’ न ‘बनाना’

हे, ‘भगवान’ अगले ‘जन्म’ में मोहे ‘शिक्षक’ न ‘बनाना’

हे, ‘भगवान’ अगले ‘जन्म’ में मोहे ‘शिक्षक’ न ‘बनाना’

बस्ती। अगर कोई शिक्षक यह भगवान से प्रार्थना करें, कि उसेे अगले जन्म में चपरासी बना देना लेकिन शिक्षक न बनाना। तो शिक्षकों का दर्द समझा जा सकता है। शिक्षकों ने इस शिक्षक को बच्चों को पढ़ाकर योग्य बनाना था, उसे बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करना और वोटर्स को तलाशना पड़ रहा है। जो काम कोई नहीं कर सकता, उसे शिक्षकों को सौंप दिया जाता हैं, और मौका पड़ने पर शिक्षकों को रगड़ने से भी नहीं चूका जाता। इतना उत्पीड़न और प्रताड़ित किया जाता है, कि शिक्षक की मौत तक हो जाती है। प्रताड़ित करने वाले अधिकारियों का तो कुछ नहीं होता, लेकिन शिक्षकों का परिवार बर्बाद हो जाता। रात- दिन एक करके पढ़ाई इस लिए नही करता, कि एक दिन उसे कुत्ता भी पकड़ना पड़ सकता है। गुरुजी बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने से लेकर जनगणना व मतगणना का कार्य करते, अब कुत्तों की गिनती भी करना इनके ही जिम्में हैं, आदेश को लेकर हो रही खूब चर्चाएं, वोटर बनाने से छुट्टी नहीं मिली और कुत्तों के गिनती में ड्यूटी लगा दिया। नियुक्ति हुई बच्चों को पढ़ाने की और बनाना पड़ रहा वोटर, जनगणना और मतगणना, सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने और स्कूल मर्जर होने का यही कारण है।

गुरूजी को भी क्या-क्या करना पड़ रहा है। शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा। जिसके लिए वह नियुक्त हुए उसे छोड़ अन्य कार्य करना पड़ रहा है। बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का कार्य कुछ हद तक ठीक था, लेकिन भला कुत्तों की गिनती करने का कोई उम्मीद भी नहीं कर सकता था। जो काम कोई करने को तैयार नहीं होता उसे शिक्षकों पर डाल दिया जाता है। विभागीय कार्य ही इतने है कि इन्हें उसी से ही फुर्सत नहीं मिल पाता है। स्कूल पहुंचने के बाद भी आटा, सब्जी, दाल और दूध के इंतजाम में जुट जाते हैं। बच्चों को ठीक से मीनू के अनुसार न खिलाएं तो मिश्राजी और बीईओ, बीएसए कार्रवाई की तलवार लटकाने लगते हैं। इनके और प्रधान के लिए भी इसी में से कुछ बखरे का इंताजम करना पड़ता है। नहीं तो यह भी स्वाद चखने पहुंच जाते हैं। डीबीटी, मीटिंग आदि से जब तक फुर्सत मिलता है, छुट्टी का समय हो जाता है। इनके पास अन्य विभाग के कार्यों को करने का फुर्सत कहां, लेकिन आदेश है तो पालन करना ही पड़ेगा। इनकी ड्यूटी पोलियो मुक्त अभियान में बच्चों को ड्राप पिलाने में लग चुकी है। गांव की जनगणना और चुनाव में मतगणना भी यही करते हैं । कोरोना में भी इनकी ड्यूटी लगी। एसआईआर और त्रिस्तरीय चुनाव का कार्य पूरा भी नहीं कर पाए। नया आदेश आ गया कि प्रत्येक स्कूल में नोडल आधिकारी नामित किए जाएंगे। जिनका संपर्क नंबर आदि मुख्य प्रवेश द्वारा पर दर्ज किया जाएगा। यह आदेश उच्च न्यायालय में योजित एक पटीशन इन री सिटी हाउंड बाई स्टे किड्स पे प्राइस व अन्य में पारित किया गया है। जिसके क्रम में इनका अनुपालन बेसिक शिक्षा विभाग बस्ती द्वारा भी आदेश जारी कर कराया जा रहा है। सोचने वाली बात यह है कि शिक्षकों का कार्य कुत्तों की गिनती करने के लिए थोड़ी न हुआ है। वह तो बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में नियुक्त लिया था। गली गली घूम कर कुत्तों की गणना की खबर चार लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। लोग खूब मजे भी ले रहे हैं। शिक्षक भी सोंच में पड़े है कि क्या दिन आ गए हैं। न करें तो कार्रवाई और करें तो हंसी और मजाक का पात्र बने। लेकिन साहबों का आदेश भला कौन टाल पाएगा ।

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